कोतवाली वार्ड में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण, प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

City/ STATE'S आगरा आगरा विकास प्राधिकरण उत्तर प्रदेश एडीए उपाध्यक्ष कमिश्नर जिलाधिकारी धर्म/ आध्‍यात्‍म/ संस्‍कृति मंडलायुक्त स्थानीय समाचार

तहकीकात TODAY 

ब्यूरो रिपोर्ट 

आगरा। शहर के कोतवाली वार्ड क्षेत्र में इन दिनों अवैध निर्माण कार्यों की बाढ़ सी आ गई है। लगातार बिना मानचित्र स्वीकृति और नियमों को ताक पर रखकर व्यावसायिक इमारतों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर खुलेआम अवैध निर्माण कार्य जारी हैं, इसके बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

सबसे बड़ा मामला फुव्वारा चौराहे के पास डीके ज्वेलर्स के बगल में बन रही एक अवैध बिल्डिंग का सामने आया है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य लगातार जारी है, जबकि निर्माण से संबंधित वैध स्वीकृतियों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि संबंधित जेई धीरेन्द्र शर्मा पूरे मामले को देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर मनोज गुप्ता की सील लगी बिल्डिंग में भी धड़ल्ले से निर्माण कार्य जारी रहने की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है। सवाल यह उठ रहा है कि जब किसी भवन को प्राधिकरण द्वारा सील किया जा चुका है तो फिर वहां निर्माण कार्य कैसे चल रहा है। यदि सील लगी बिल्डिंग में निर्माण हो रहा है तो यह सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

इतना ही नहीं, मनोज गुप्ता के बगल में धनकुमार जैन द्वारा बिना मानचित्र स्वीकृति के एक व्यावसायिक मार्केट बनाए जाने का मामला भी चर्चा में है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिना किसी वैध अनुमति के व्यावसायिक निर्माण तेजी से किया जा रहा है, वही धनकुमार जैन द्वारा जिस मार्किट का निर्माण कराया जा रहा है उसको लेकर कई वीडियो शोशल मीडिया पर भी वायरल हुए है जिसमे बिल्डिंग मे मजार व स्तम्भ होने का दावा किया जा रहा है। वीडियो देखने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी यानि की जूनियर इंजिनियर धीरेन्द्र कुमार शर्मा कार्रवाई करने के बजाय मौन साधे हुए हैं।

 

क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जेई धीरेन्द्र कुमार शर्मा की कार्यशैली अब सवालों के घेरे में है। लगातार अवैध निर्माण होने के बावजूद कार्रवाई न होना भ्रष्टाचार की ओर स्पष्ट संकेत देता है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते कार्रवाई की जाती तो अवैध निर्माण पर रोक लग सकती थी और प्राधिकरण को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान से बचाया जा सकता था।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर अवैध निर्माण का खेल यूं ही चलता रहेगा।

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