तहकीकात TODAY
रिपोर्ट – फरहान खान/ मोहम्मद सुमेर
रांची। झारखंड में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी को लेकर उठे सवालों के बीच रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना 15वें दिन भी जारी रहा। बारिश के बीच आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। मामले में सबसे गंभीर सवाल परीक्षा आयोजित कराने वाली टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) को लेकर उठ रहे हैं। जांच से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, इस कंपनी को मई 2025 में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के चलते ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसके बावजूद 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के आयोजन से जुड़ा काम कंपनी को दिए जाने को लेकर अब सवाल खड़े हो गए हैं।मामले की जांच कर रही CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि जिस कंपनी पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी थी, उसे JPSC की महत्वपूर्ण परीक्षा से जुड़ा काम किस आधार पर सौंपा गया। जांच का एक अहम पहलू टेंडर प्रक्रिया, कंपनी की पात्रता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी बताया जा रहा है।

यदि किसी एजेंसी को पहले ही सरकारी परीक्षा से संबंधित अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था, तो उसके बाद उसे दूसरी महत्वपूर्ण परीक्षा की जिम्मेदारी कैसे मिली, यह सवाल छात्रों के आंदोलन का भी प्रमुख मुद्दा बन गया है। मामले में अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। इनमें TDPL से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी, JPSC के कर्मचारी, कथित फर्जी अभ्यर्थी और बिचौलिए शामिल बताए जा रहे हैं। जांच में कथित तौर पर OMR शीट, परीक्षा प्रक्रिया और वित्तीय लेन-देन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। वहीं JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते से भी CID द्वारा पूछताछ की जा चुकी है। अब जांच की दिशा आयोग के मौजूदा सदस्यों तक भी पहुंच गई है। रिपोर्टों के मुताबिक JPSC के वर्तमान सदस्यों अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा और जमाल अहमद को क्रमशः 10, 12 और 14 अगस्त को पूछताछ के लिए समन किया गया है। परीक्षा विवाद को लेकर छात्र 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC PT को रद्द करना, मामले की स्वतंत्र जांच कराना और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। छात्रों के समर्थन में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भी अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। आंदोलनकारियों की ओर से JSSC-CGL परीक्षा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर विचार करने और सुझाव लेने की बात कही गई है। वहीं आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। JPSC परीक्षा विवाद ने राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और निजी एजेंसियों पर निर्भरता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों की तैयारी में वर्षों मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य परीक्षा प्रणाली की कथित गड़बड़ियों की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। मामले में CID की जांच आगे बढ़ रही है और आयोग से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ का दौर भी जारी है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा का काम किस प्रक्रिया के तहत मिला, कथित अनियमितताओं के पीछे कौन-कौन लोग थे और अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ हुए नुकसान की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी। छात्र संगठनों ने संकेत दिया है कि ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल JPSC परीक्षा विवाद ने झारखंड में युवाओं और परीक्षा व्यवस्था के बीच भरोसे के संकट को गहरा कर दिया है।





