तहकीकात TODAY
रिपोर्ट – फरहान खान/ जाहिद सलमानी
नई दिल्ली। राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों, मकानों और अन्य निर्माणों के खिलाफ चल रही ध्वस्तीकरण (बुलडोज़र) कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित संपत्तियों पर दो सप्ताह तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को अपने संवैधानिक और कानूनी तर्कों के साथ राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित डिवीजन बेंच का रुख करने का निर्देश दिया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से लगभग 40 प्रभावित लोगों की तरफ से दायर विशेष याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ैफ़ा अहमदी, निज़ाम पाशा, ताहिर हकीम और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड मंसूर अली खान भी मौजूद रहे। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने की।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि सीमावर्ती जिलों में मकानों, मस्जिदों, मदरसों और अन्य संपत्तियों के खिलाफ लगातार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है तथा बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए हैं। पक्षकारों ने दलील दी कि किसी भी संपत्ति के विरुद्ध कार्रवाई संविधान, कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप ही होनी चाहिए। इस मामले में इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट में भी याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद अपेक्षित राहत नहीं मिलने पर याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि अब न्यायालय के निर्देशानुसार राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में याचिका दायर की जाएगी। उन्होंने कहा कि संगठन प्रभावित लोगों और संबंधित धार्मिक एवं अन्य संपत्तियों के संवैधानिक तथा कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए सभी वैधानिक मंचों पर अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।





