STF इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा: करोड़ों की रिश्वत ठुकराने वाले ईमानदार अफसर की प्रेरणादायक कहानी

Exclusive आगरा उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन स्थानीय समाचार

तहकीकात TODAY

रिपोर्ट — फरहान खान 

आगरा। कभी-कभी पुलिस की वर्दी सिर्फ कानून का प्रतीक नहीं होती, बल्कि ईमानदारी, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की जीती-जागती मिसाल बन जाती है। आगरा की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) में तैनात इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा आज ऐसे ही अफसर के रूप में सामने आए हैं, जिनकी बहादुरी और ईमानदारी की चर्चा हर जुबान पर है।

मध्यप्रदेश के ग्वालियर निवासी यतेंद्र शर्मा ने वर्ष 2001 में यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर वर्ष 2018 में वह इंस्पेक्टर बने। अपने लंबे सेवा काल में उन्होंने मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में बड़े ऑपरेशन चलाकर अपराधियों के खिलाफ अहम कार्रवाई की।

उनकी बहादुरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2007 में जालौन में कुख्यात अपराधी अनूप गुर्जर के खिलाफ बड़े ऑपरेशन में शामिल होने पर उन्हें राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा 50 हजार के इनामी अपराधी मंगली केवल को AK-47 के साथ गिरफ्तार करना और राजस्थान में 10 लाख 35 हजार के इनामी डकैत गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 20 इनामी बदमाशों को पकड़ना उनकी बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।

इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा न सिर्फ बहादुर बल्कि अत्यंत प्रशिक्षित और अनुशासित अधिकारी भी हैं। भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के साथ-साथ बीहड़ों और जंगलों में लंबे समय तक ऑपरेशन चलाने में माहिर हैं। वह अब तक पांच बार आमने-सामने की मुठभेड़ों का सामना कर चुके हैं और उनकी निशानेबाजी इतनी सटीक है कि 300 मीटर तक लक्ष्य भेद सकते हैं।

हाल ही में आगरा में नकली दवाओं के बड़े रैकेट का STF और ड्रग विभाग की टीम ने भंडाफोड़ किया, जिसमें 3 करोड़ रुपये से अधिक की नकली दवाएं बरामद हुईं। इस कार्रवाई के दौरान आरोपी कारोबारी ने इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा को 1 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बिना किसी लालच के आरोपी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इतना ही नहीं, आरोपी द्वारा रिश्वत की रकम बढ़ाने के प्रयास के बावजूद वह अपने फैसले पर अडिग रहे।

ईमानदारी की एक और मिसाल तब सामने आई जब ट्रेन यात्रा के दौरान उन्हें लाखों रुपये कीमत की सोने की चैन मिली। उन्होंने बिना देर किए चैन को उसके असली मालिक तक पहुंचाकर अपनी सच्चाई और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया।अपने करियर में उन्होंने अवैध हथियार गिरोह, फर्जी भर्ती और नौकरी घोटालों का पर्दाफाश किया है। आगरा में सेना भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह को पकड़ने में भी उनकी अहम भूमिका रही है।

यतेंद्र शर्मा का व्यक्तित्व केवल पुलिसिंग तक सीमित नहीं है। वह NCC के ‘C’ सर्टिफिकेट होल्डर रहे हैं और ऑल इंडिया परेड को कमांड कर चुके हैं। नेशनल लेवल के स्केटिंग खिलाड़ी रह चुके शर्मा मध्यप्रदेश में दो बार स्टेट चैंपियन भी बने हैं। इसके अलावा पैरासेलिंग, स्विमिंग, साइक्लिंग, कायकिंग और केनोइंग जैसे वाटर स्पोर्ट्स में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है सहकर्मियों के अनुसार यतेंद्र शर्मा ऐसे अधिकारी हैं जो न दबाव में आते हैं और न ही लालच में झुकते हैं। उनकी सख्त कार्रवाई से अपराधी खौफ खाते हैं, जबकि आम जनता उन्हें भरोसे की नजर से देखती है।

इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा की यह कहानी साबित करती है कि वर्दी की असली ताकत हथियारों में नहीं, बल्कि ईमानदारी, साहस और कर्तव्यनिष्ठा में होती है। ऐसे अधिकारी ही समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत बनाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *