तहकीकात TODAY
रिपोर्ट – फरहान खान / मोनिश उद्दीन
आगरा। ताजमहल के साये में रविवार को जैन धर्म, दर्शन और आत्म-विकास की अद्भुत झलक देखने को मिली। ताज खेमा स्थित परिसर में आयोजित ‘वंडरफुल जैनिज़्म’ ग्रैंड सेशन में बड़ी संख्या में युवा, युवतियां, महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान पूरा सभागार युवाओं से खचाखच भरा रहा और ‘Proud to be a Jain’ के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा। संत चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य आचार्य भगवन श्री 108 विशुद्ध सागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य श्रमण मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज, श्रमण मुनि श्री 108 शील सागर जी महाराज एवं श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में आयोजित इस विशेष सत्र का उद्देश्य युवाओं को जैन दर्शन, संस्कार, आध्यात्मिकता और आत्म-विकास से जोड़ना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद संजय जैन जोधपुर एवं वीरेंद्र जैन शास्त्री द्वारा मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया गया। एवरेस्ट से लेकर भारतीय वायुसेना तक, उपलब्धियों का हुआ सम्मान कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली जैन समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इनमें दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर जैन धर्म का ध्वज लेकर समाज का गौरव बढ़ाने वाली पर्वतारोही यशी जैन, भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर कुलदीप जैन, स्क्वाड्रन लीडर नूपुर जैन, एमिटी विश्वविद्यालय के निदेशक अक्षय जैन, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक चंडीगढ़ एस.के. जैन, सेवानिवृत्त कमिश्नर गाजियाबाद एस.के. जैन, डिप्टी सीएम डॉ. पीयूष जैन, लेफ्टिनेंट रोहित जैन तथा नासा से जुड़े रहे अनंत रॉय जैन सहित अन्य विशिष्ट प्रतिभाओं को श्रुत मंथन वर्षायोग समिति की ओर से सम्मानित किया गया। ‘आपके सिर पर ताज है’—मुनि श्री का युवाओं को संदेश संयुक्त धर्मसभा में बोलते हुए मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने युवाओं को उपलब्धियों, आत्मविश्वास और जैन मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह किसी उपलब्धि के बाद व्यक्ति गर्व से तिरंगा उठाता है, उसी तरह जैन धर्म और अपनी संस्कृति को लेकर भी गौरव का भाव होना चाहिए। उन्होंने ताजमहल का उदाहरण देते हुए युवाओं से कहा कि दुनिया ताजमहल देखने आती है, लेकिन आज ताज के सामने जैन धर्म के ‘वंडर्स’ को देखने के लिए लोग जुटे हैं। उन्होंने कहा कि पीछे ताजमहल दिखाई देता है, लेकिन उनके सामने बैठे युवाओं के सिर पर उन्हें ‘ताज’ दिखाई दे रहा है।

मुनि श्री ने युवाओं से सवाल किया कि “क्या आप सच में थक गए हैं या जाग गए हैं?” इसके बाद उन्होंने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि जागे हुए लोगों की आवाज में अलग ऊर्जा होती है। उन्होंने कहा कि कई बार युवा खुद को ‘जीरो’ समझने लगते हैं, लेकिन वही जीरो जब सही जगह जुड़ता है तो उसकी वैल्यू कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद विभिन्न क्षेत्रों के सफल लोगों का उदाहरण देते हुए युवाओं को संदेश दिया कि आज जो लोग बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं, वे भी कभी उन्हीं की तरह अपने भविष्य को लेकर संघर्ष कर रहे थे। गूगल बाबा’ से लेकर जैनिज्म की ऊंचाइयों तक मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज ने अपने सहज और रोचक अंदाज में युवाओं से संवाद किया। उन्होंने अपने पूर्व परिचय और ‘गूगल बाबा’ नाम का जिक्र करते हुए माहौल को हल्का-फुल्का बनाया। उनकी बातों पर युवाओं ने जमकर उत्साह दिखाया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म की वैल्यू के साथ ऊंचाइयां हासिल करने का जज्बा युवाओं के भीतर होना चाहिए। उनका संदेश साफ था कि जैन होना केवल पहचान नहीं, बल्कि अपने जीवन में जैन मूल्यों को उतारने की प्रेरणा भी है। कार्यक्रम के दौरान युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। ताजमहल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और जैन धर्म के आध्यात्मिक संदेश के बीच आयोजित इस कार्यक्रम ने युवाओं को अपनी संस्कृति, धर्म और मूल्यों पर गर्व करने का संदेश दिया। कार्यक्रम का मंच संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया। इस अवसर पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के राजीव जैन (कपड़ा), चक्रेश जैन, विवेक जैन, गौरव जैन (कांटे वाले), सनी जैन, विनीत जैन, संभव जैन, युग जैन, हितेश जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित समस्त मंडल एवं सकल जैन समाज के लोग मौजूद रहे।





