तहकीकात TODAY
रिपोर्ट — फरहान खान / फैजान उद्दीन
आगरा। शहर के अस्ताना-ए-मैकश स्थित खानकाह कादरिया चिश्तिया नियाज़िया, मेवा कटरा में हज़रत अली करम अल्लाह वज्हुहू की इमामत की याद में जश्न-ए-मौला अली बड़े ही अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर मौला अली की शान में अपनी मोहब्बत और अकीदत का इज़हार किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता खानकाह कादरिया चिश्तिया नियाज़िया के सज्जादा नशीन हज़रत सैयद मोहम्मद अजमल अली शाह कादरी चिश्ती जाफरी नियाज़ी ने की। बाद नमाज़-ए-मगरिब फातिहा ख्वानी का आयोजन हुआ, जिसके बाद मौला अली की शान में मनकबत पेश की गई। इस अवसर पर मौजूद लोगों ने पूरे जोश और श्रद्धा के साथ मौला अली की शान में नारे लगाए। कार्यक्रम के समापन पर लंगर का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। अपने संबोधन में सज्जादा नशीन हज़रत सैयद मोहम्मद अजमल अली शाह कादरी चिश्ती जाफरी नियाज़ी ने कहा कि आज का दिन इस्लामी इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन मौला-ए-कायनात हज़रत अली को दुनिया का पहला इमाम बनाया गया था। उन्होंने कहा कि हज़रत अली का मुकाम इस्लाम में बेहद बुलंद है और उनकी शख्सियत इंसाफ, बहादुरी, इल्म और इंसानियत की मिसाल है। उन्होंने कहा कि रसूल-ए-खुदा हज़रत मोहम्मद मुस्तफा ﷺ ने फरमाया था, “मैं जिसका मौला हूँ, उसके अली भी मौला हैं।” यही वजह है कि दुनिया भर के मुसलमान हज़रत अली से मोहब्बत को अपने ईमान का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा कि मौला अली ने अपनी पूरी जिंदगी इंसाफ और सच्चाई के रास्ते पर गुजारी। उनके दरबार से कोई भी इंसाफ मांगने आता था तो वह निराश नहीं लौटता था। हज़रत अली की जिंदगी आज भी इंसाफ और इंसानियत का सबसे बड़ा पैगाम देती है। उन्होंने कहा कि हज़रत अली की मोहब्बत इंसान को नेक रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है और उनके बताए हुए उसूल समाज में भाईचारे और अमन को मजबूत करते हैं। वहीं खानकाह के जानशीन सैयद फैज अली शाह कादरी चिश्ती नियाज़ी ने कहा कि आज पूरी दुनिया में जश्न-ए-मौला अली मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रसूल-ए-खुदा ﷺ ने फरमाया कि जो मेरे अली से मोहब्बत करेगा वह कभी मायूस नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मौला अली की मोहब्बत इंसान को अल्लाह और उसके रसूल के करीब ले जाती है। हज़रत अली की इमामत का दिन पूरी उम्मत के लिए खुशी और रहमत का दिन है, इसलिए हर मुसलमान को इस दिन को अकीदत और एहतराम के साथ मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अहले बैत से मोहब्बत इंसान को जन्नत की राह दिखाती है और हज़रत अली की तालीमात पर अमल कर समाज में इंसाफ, भाईचारा और इंसानियत को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को भी हज़रत अली की सीरत और किरदार से परिचित कराएं ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर बेहतर समाज के निर्माण में योगदान दे सके। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शाहिद नदीम, माहिर अकबराबादी, अख्तर ओवैसी, सनी आमिर नियाज़ी, ताज भाई, हाजी अल्ताफ हुसैन, हाजी तौफीक सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा तथा लोगों ने मौला अली की शान में खिराज-ए-अकीदत पेश किया।





