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रिपोर्ट — फैजान उद्दीन उर्फ़ गुड्डू भारती
आगरा। इस्लामी इतिहास में ग़दीरे ख़ुम की घटना को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार यह वह अवसर था जब पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद (स.) ने अपने अंतिम हज के बाद मक्का और मदीना के बीच स्थित ग़दीर नामक स्थान पर एक विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए महत्वपूर्ण संदेश दिया था। बताया जाता है कि 18 ज़िलहिज्जा को ईश्वरीय आदेश प्राप्त होने के बाद पैग़म्बरे इस्लाम ने आगे निकल चुके हाजियों को वापस बुलाया तथा पीछे रह गए लोगों की प्रतीक्षा कर सभी को एकत्रित किया। इसके बाद ऊंटों की काठियों से बने एक मंच से उन्होंने लगभग एक लाख बीस हजार हाजियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने उपस्थित लोगों से पूछा कि क्या उन्हें उनकी जानों से अधिक अधिकार प्राप्त है, जिस पर सभी ने सहमति व्यक्त की। इसके उपरांत उन्होंने हज़रत अली (अ.) का हाथ उठाकर उन्हें अपना उत्तराधिकारी और मार्गदर्शक घोषित करने संबंधी संदेश दिया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी अवसर पर ईश्वर की ओर से यह संदेश भी अवतरित हुआ कि धर्म को पूर्ण कर दिया गया है तथा लोगों के लिए इस्लाम को पसंद किया गया है। पैग़म्बरे इस्लाम ने अपने अनुयायियों को कुरआन और अपने परिजनों से जुड़े रहने की भी नसीहत दी तथा कहा कि इन दोनों से जुड़े रहने पर वे मार्गभ्रष्ट नहीं होंगे। विद्वानों का कहना है कि ग़दीरे ख़ुम की घटना केवल एक ऐतिहासिक प्रसंग नहीं बल्कि इस्लामी समाज के भविष्य और नेतृत्व से जुड़ा महत्वपूर्ण अध्याय है। उनके अनुसार इस घटना ने पैग़म्बरे इस्लाम के बाद नेतृत्व और मार्गदर्शन के विषय को स्पष्ट किया तथा हज़रत अली (अ.) के विशेष स्थान को रेखांकित किया। धार्मिक चिंतकों का मानना है कि ग़दीरे ख़ुम का संदेश आज भी मुसलमानों के लिए एकता, नेतृत्व और आध्यात्मिक मार्गदर्शन का स्रोत है। उनका कहना है कि इस ऐतिहासिक घटना को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है ताकि नई पीढ़ियां इस्लामी इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय से परिचित हो सकें। ग़दीरे ख़ुम की घटना के कुछ ही महीनों बाद पैग़म्बरे इस्लाम के स्वर्गवास से पूरे इस्लामी समाज में शोक की लहर फैल गई। इसके बाद उत्तराधिकार और नेतृत्व को लेकर विभिन्न मत सामने आए, जो आगे चलकर इस्लामी इतिहास का महत्वपूर्ण विषय बने। अनेक इतिहासकारों और शोधकर्ताओं ने इस घटना का विस्तृत अध्ययन किया है तथा इसे इस्लामी इतिहास की निर्णायक घटनाओं में शामिल किया है। धार्मिक विद्वानों का कहना है कि ग़दीरे ख़ुम का संदेश केवल इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज भी इंसाफ, नेतृत्व, नैतिकता और सही मार्गदर्शन की सीख देता है। इसी कारण दुनिया भर में करोड़ों मुसलमान हर वर्ष 18 ज़िलहिज्जा को ईद-ए-ग़दीर के रूप में मनाते हैं और इस ऐतिहासिक घटना को याद करते हैं।





