तहकीकात TODAY
रिपोर्ट — फरहान खान / मोनिश उद्दीन
कैमरामैन — मोहम्मद सुमेर
आगरा। राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी ने आगरा के जैंगारा गांव में आयोजित स्वाभिमान सभा को संबोधित करते हुए संगठन की ताकत, कार्यकर्ताओं के संघर्ष, किसानों की समस्याओं, तकनीकी शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हार और जीत दोनों देखी हैं, लेकिन संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं का हौसला और संगठन के प्रति उनका समर्पण ही किसी भी राजनीतिक दल की असली ताकत होता है। अपने संबोधन में उन्होंने क्षेत्र के लोगों के स्वाभिमान का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के लोग देश और अपनी मिट्टी के लिए झुकते हैं, किसी ऐरे-गैरे के सामने नहीं।

जयंत चौधरी ने कहा कि जैंगारा भले ही छोटा गांव हो, लेकिन यहां से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संदेश निकलकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि रालोद के कार्यकर्ता संघर्ष की राजनीति से निकले हैं और उन्हें अपने योगदान का अहसास है। पार्टी की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कम विधायक होने के दौर में भी पार्टी ने अपनी राजनीतिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कांग्रेस के 99 विधायकों और रालोद के एक विधायक का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने राजस्थान में सरकार गठन के संदर्भ में भी एक विधायक की भूमिका का उल्लेख किया। जयंत चौधरी ने भरोसा जताया कि पार्टी के पास अनुभवी नेता और समर्पित कार्यकर्ताओं की ऐसी टीम है, जो संगठन को मजबूती देने का काम कर सकती है।

सभा में जयंत चौधरी ने राजनीतिक बयानबाजी और स्वाभिमान के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की टिप्पणियों का अपेक्षित असर नहीं हुआ, लेकिन बाद में उन्हीं बयानों को लेकर नाराजगी दिखाई गई। उनके संबोधन में कार्यकर्ताओं के सम्मान और संगठन की राजनीतिक पहचान का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि पार्टी की पहचान केवल विधायकों की संख्या से नहीं, बल्कि उसके कार्यकर्ताओं की मेहनत और समर्पण से भी होती है।
आगरा के उद्योग और पहचान का किया जिक्र
जयंत चौधरी ने आगरा की ऐतिहासिक और आर्थिक पहचान का उल्लेख करते हुए ताजमहल, जूता उद्योग और पेठे की चर्चा की। उन्होंने कहा कि आगरा का जूता उद्योग बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का आधार है। उनके संबोधन में जूता कारोबार से जुड़े लगभग चार लाख परिवारों का उल्लेख किया गया। उन्होंने इस उद्योग को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। आगरा का पेठा भी यहां की पहचान से जुड़ा प्रमुख उत्पाद है, जो शहर को अलग पहचान दिलाता है।

उन्होंने कहा कि आगरा जैसे शहरों में पारंपरिक कारोबार के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और कौशल विकास को भी बढ़ावा देने की जरूरत है। स्थानीय उद्योगों को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षित युवाओं की भूमिका अहम हो सकती है। यदि युवाओं को जरूरत के मुताबिक तकनीकी प्रशिक्षण मिले, तो वे रोजगार हासिल करने के साथ उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाने में भी योगदान दे सकते हैं।
तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास पर जोर
जयंत चौधरी ने युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कैफ खान का उदाहरण देते हुए बताया कि दसवीं कक्षा के बाद पेंटिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने वाले युवा ने प्रशिक्षण हासिल किया और शंघाई में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में भाग लिया। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि सही प्रशिक्षण, मेहनत और अवसर मिलने पर युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।

उन्होंने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई की भूमिका पर भी चर्चा की। उनका कहना था कि तकनीकी प्रशिक्षण संस्थानों को युवाओं को व्यावहारिक कौशल से जोड़ने के केंद्र के रूप में देखा जाना चाहिए। दुनिया में भारतीय युवाओं के कौशल की मांग बढ़ रही है और इस अवसर का लाभ उठाने के लिए प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाना जरूरी है। उनके संबोधन में आईटीआई और कौशल विकास के क्षेत्र में 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश का भी उल्लेख किया गया। इस निवेश से जुड़ी योजना और उसके क्रियान्वयन का विस्तृत ब्योरा सभा में दिए गए उपलब्ध विवरण में स्पष्ट नहीं है।

किसानों की आय और खेती को लाभकारी बनाने की बात
जयंत चौधरी ने खेती-किसानी की चुनौतियों को उठाते हुए कहा कि कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाना जरूरी है। उन्होंने खेती की तुलना दूसरे व्यवसायों से करते हुए कहा कि आमतौर पर कारोबार में निवेश के बाद मुनाफे की उम्मीद की जाती है, लेकिन किसानों के लिए खेती में लागत और आमदनी के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

उन्होंने एथेनॉल उत्पादन का समर्थन करते हुए कहा कि इसे किसानों की फसल और कृषि अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, एथेनॉल का उत्पादन कृषि उपज के इस्तेमाल का एक माध्यम बन सकता है। उन्होंने एथेनॉल का विरोध किए जाने को किसानों के हितों से जोड़कर अपनी बात रखी। साथ ही आलू उत्पादक क्षेत्रों में एथेनॉल निर्माण की संभावनाओं का जिक्र किया और इसके लिए सब्सिडी तथा 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर का उल्लेख किया। हालांकि, इस दर का आधार, लागू होने की शर्तें और संबंधित योजना का पूरा विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
कृषि आधारित उद्योगों से किसानों को लाभ की उम्मीद
जयंत चौधरी के संबोधन में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने का मुद्दा भी प्रमुख रहा। उन्होंने आलू उत्पादक क्षेत्रों में एथेनॉल उत्पादन की संभावनाओं की चर्चा करते हुए कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। इस तरह की पहल से किसानों की उपज के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार करने और ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ उत्पादन क्षमता, खरीद की व्यवस्था, लागत, बाजार और सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

सभा के दौरान जयंत चौधरी ने किसानों, युवाओं, स्थानीय उद्योगों और पार्टी संगठन से जुड़े मुद्दों को एक साथ उठाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के संघर्ष और स्वाभिमान को रालोद की पहचान से जोड़ते हुए संगठन को मजबूत बनाए रखने का संदेश दिया। वहीं, तकनीकी शिक्षा और कृषि आधारित उद्योगों के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

जैंगारा में आयोजित इस सभा में जयंत चौधरी का संबोधन मुख्य रूप से राजनीतिक स्वाभिमान, संगठन की भूमिका, किसानों की आय, एथेनॉल उत्पादन और कौशल विकास के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। उनके बयान में जहां रालोद के कार्यकर्ताओं के संघर्ष का उल्लेख था, वहीं आगरा के औद्योगिक महत्व और खेती-किसानी को लाभकारी बनाने की जरूरत पर भी जोर दिखाई दिया।





