तहकीकात TODAY
रिपोर्ट – फरहान खान/ मोनिस उद्दीन
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली जमीयत उलमा की मजलिस-ए-मुंतज़िमा की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को मस्जिद एक मीनारा, ललिता पार्क, लक्ष्मी नगर में आयोजित हुई। बैठक में संगठन की कार्यप्रणाली, आगामी गतिविधियों और रिक्त पदों को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में पूर्वी दिल्ली जमीयत उलमा के सदस्यों के साथ जमीयत उलमा-ए-दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद क़ासिम नूरी क़ासमी, उपाध्यक्ष मौलाना ख़लील अहमद क़ासमी, मौलाना क़ारी आरिफ़ क़ासमी, नाज़िम-ए-आला मौलाना आफ़ताब आलम सिद्दीक़ी, नाज़िम-ए-तंज़ीम मौलाना यूसुफ़ आज़मी और एडिशनल जनरल सेक्रेटरी मौलाना क़ारी एह़रार जौहर क़ासमी समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। बैठक की शुरुआत मस्जिद एक मीनारा के नायब इमाम क़ारी मुहम्मद कैफ़ की तिलावत-ए-क़ुरआन से हुई। इसके बाद मुफ्ती किफ़ायतुल्लाह नदवी ने नात-ए-पाक पेश की।पूर्वी दिल्ली जमीयत उलमा के पूर्व महासचिव डॉ. मुश्ताक अंसारी के निधन के बाद रिक्त हुए महासचिव पद पर बैठक में चर्चा की गई। मजलिस-ए-मुंतज़िमा के सदस्यों ने सर्वसम्मति से मस्जिद एक मीनारा के इमाम मुफ्ती अब्दुल वाहिद क़ासमी को पूर्वी दिल्ली जमीयत उलमा का महासचिव निर्वाचित किया। संगठन की जरूरतों और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए क़ारी यासीन को कार्यकारी अध्यक्ष तथा क़ारी अब्दुल्ला को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। उपाध्यक्ष क़ारी आरिफ़ क़ासमी ने कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा, जिस पर उपस्थित सदस्यों ने सहमति जताई। जमीयत उलमा-ए-दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद क़ासिम नूरी क़ासमी ने अपने संबोधन में संगठन में एकता और आपसी सहयोग को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने जमीयत उलमा-ए-हिंद के मिशन और उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए ईमानदारी, एकजुटता और सामूहिक प्रयास के साथ काम करने का आह्वान किया। प्रदेश उपाध्यक्ष मुफ्ती ख़लील अहमद क़ासमी ने मुफ्ती अब्दुल वाहिद क़ासमी को महासचिव चुने जाने पर बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि वह पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ संगठन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।नवनिर्वाचित महासचिव मुफ्ती अब्दुल वाहिद क़ासमी ने ‘आदर्श मस्जिद’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने मस्जिद-ए-नबवी ﷺ को मुस्लिम समाज की मस्जिदों के लिए सर्वोत्तम आदर्श बताते हुए कहा कि मस्जिदों को केवल नमाज़ की अदायगी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।उन्होंने धार्मिक शिक्षा, सुधार, दावत, जनसेवा और सामाजिक मार्गदर्शन को भी मस्जिदों की गतिविधियों का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने मस्जिद एक मीनारा में संचालित मदरसा, मकतब, दारुल-क़ज़ा, इफ्ता, कुरआन-हदीस की शिक्षा और बैतुलमाल जैसी सेवाओं का उल्लेख करते हुए अन्य मस्जिदों के जिम्मेदारों से भी व्यापक धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियां संचालित करने की अपील की। बैठक के दौरान पूर्व महासचिव डॉ. मुश्ताक अंसारी की धार्मिक एवं संगठनात्मक सेवाओं को याद किया गया। उपस्थित लोगों ने उनके लिए दुआ-ए-मगफिरत और ईसाल-ए-सवाब किया तथा अल्लाह से उनके लिए मगफिरत, रहमत और बुलंद दर्जात की दुआ की। बैठक में जमीयत उलमा-ए-दिल्ली और पूर्वी दिल्ली के बड़ी संख्या में उलमा, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। अंत में क़ारी आरिफ़ क़ासमी की दुआ के साथ बैठक का समापन हुआ।





