तहकीकात TODAY
रिपोर्ट – देवेंद्र राजपूत
आगरा। ककरैठा क्षेत्र में नगर निगम की करीब 4710 वर्गमीटर बेशकीमती जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। अदालत के फैसले के बाद जमीन के कब्जे का मामला नया मोड़ ले चुका है। आरोप है कि लंबे समय से नगर निगम के कब्जे में रही जमीन अब उसके हाथ से निकल गई है। दस्तावेजों के मुताबिक, 2008 में तत्कालीन एसडीएम ने जमीन से जुड़े पट्टों को फर्जी करार दिया था। लक्ष्मी नारायण शर्मा समेत अन्य लोगों के नाम जारी पट्टों को लेकर भी उस समय गंभीर सवाल उठे थे। मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त की ओर से आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए आख्या भी भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, दस्तावेजों के मुताबिक इसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने का आरोप है। अब अदालत के फैसले के बाद जमीन के कब्जे को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस जमीन का इस्तेमाल नगर निगम के कूड़ा कलेक्शन वाहनों और मजदूरों से जुड़े काम में भी होता रहा है। जमीन से करीब 150 कूड़ा कलेक्शन वाहन और लगभग 300 मजदूर परिवारों के प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। जमीन से जुड़े कई अहम दस्तावेज Prime News के पास मौजूद हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि वर्ष 2008 में पट्टों को फर्जी बताए जाने और मुकदमे की आख्या दिए जाने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अब अदालत के फैसले के बाद जमीन के मामले में नगर निगम अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।





