तहकीकात TODAY
रिपोर्ट – फरहान खान/ अजेंद्र चौहान
आगरा। अदालत में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मुकदमे की पत्रावली में दर्ज दस्तावेजों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी मामले में ताराचंद शर्मा उस समय चर्चा में आ गए, जब उन्होंने अदालत में खुद को जिंदा बताते हुए अपना पक्ष रखा, जबकि मुकदमे की पत्रावली में उनके नाम से मृत्यु प्रमाणपत्र दर्ज था। बताया गया कि मामले की सुनवाई के दौरान ताराचंद शर्मा ने कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर खुद को जीवित बताया। उन्होंने पत्रावली में शामिल मृत्यु प्रमाणपत्र को लेकर सवाल उठाए। साथ ही दस्तावेज में दर्ज नाम और पते में अंतर होने की बात भी अदालत के सामने रखी। मामले में यह तथ्य सामने आने के बाद न्यायालय में स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई। ताराचंद शर्मा की ओर से जमानत की मांग भी की गई, लेकिन अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार नहीं की और आरोपी को जेल भेज दिया। मुकदमे की पत्रावली में दर्ज मृत्यु प्रमाणपत्र और अदालत में स्वयं को जिंदा बताने वाले ताराचंद शर्मा के दावे ने पूरे मामले को पेचीदा बना दिया है। अब दस्तावेजों की वास्तविकता और मामले से जुड़े तथ्यों को लेकर आगे की न्यायिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।





