‘Proud to be a Jain’ के उद्घोष से गूंजा निर्मल सेवा सदन

City/ STATE'S आगरा उत्तर प्रदेश

तहकीकात TODAY 

रिपोर्ट – फरहान खान/ फैजान उद्दीन 

आगरा। छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में जैन धर्म, दर्शन, मूल्यों, आध्यात्मिकता और आत्म-विकास पर आधारित ‘Wonderful Jainism-6’ का शानदार एवं प्रेरणादायी सत्र आयोजित हुआ। संत चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य आचार्य भगवन श्री 108 विशुद्ध सागर महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य श्रमण मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज, श्रमण मुनि श्री 108 शील सागर महाराज एवं श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, युवतियां, महिलाएं एवं पुरुष शामिल हुए।

कार्यक्रम के शुभारंभ पर भक्तों ने मुनिराज का पाद प्रक्षालन किया। ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता से भरे कार्यक्रम में सभागार युवाओं से खचाखच भरा रहा। युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ “Proud to be a Jain” का उद्घोष किया। मुनिराज के ओजस्वी एवं प्रेरणादायी प्रवचनों ने युवाओं को भाव-विभोर कर दिया और कई श्रद्धालुओं की आंखों में आंसू छलक उठे। संयुक्त धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज ने कहा कि हर दिन सुबह होती है और हर दिन शाम भी होती है, लेकिन जीवन जीने की कला सीखना सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से कहा कि ऐसी सुबह हो जो जीवन में उम्मीद लेकर आए और ऐसी शाम हो जो खुशियां देकर जाए। इसके लिए जीवन में निरंतर मेहनत और सही दिशा आवश्यक है।

मुनिराज ने राम और रावण का उदाहरण देते हुए युवाओं को आत्ममंथन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन समाप्त होने के बाद लोग आपके नाम के साथ क्या शब्द जोड़ेंगे—‘था’ या ‘थे’, यह आपके आज के कर्म और आचरण से तय होगा। राम का जीवन ऐसा रहा कि उनके लिए ‘थे’ शब्द सम्मान के साथ बोला जाता है, जबकि रावण के लिए ‘था’ कहा जाता है। उन्होंने युवाओं से अपने जीवन को ऐसा बनाने का आह्वान किया कि उनके पीछे भी सम्मान और आदर के शब्द बोले जाएं। मुनिराज ने कहा कि आज के युवा स्मार्ट वॉच, स्मार्टफोन, ब्रांडेड कपड़े, गॉगल, बाइक, कार और शानदार व्यक्तित्व को सफलता की पहचान मानते हैं, लेकिन वास्तविक व्यक्तित्व बाहरी दिखावे से नहीं बल्कि विचार, संस्कार और व्यवहार से बनता है। उन्होंने कहा कि जीवन को केवल दिखावे का ‘चाइनीज आइटम’ नहीं बनाना है, बल्कि ऐसा बनाना है जो टिकाऊ और मूल्यवान हो।

उन्होंने युवाओं को स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के बीच का अंतर समझाते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत में नागरिकों को आजादी मिली है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति मनमानी करे। स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी और अनुशासन भी जरूरी है। उन्होंने युवाओं से परिवार, माता-पिता और समाज के प्रति अपने व्यवहार पर विचार करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बेटियों के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण को लेकर विशेष कार्यशाला भी आयोजित की गई। दिल्ली से आईं विशेष ट्रेनर प्रिया जैन एवं अंजना जैन ने युवतियों को आत्मविश्वासी, खुशहाल, मजबूत, जागरूक, सकारात्मक और निर्णय लेने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला का संदेश रहा कि बेटियों को केवल सुरक्षित नहीं, बल्कि सक्षम और सशक्त बनाना जरूरी है, ताकि वे जीवन की हर चुनौती का मजबूती और प्रसन्नता के साथ सामना कर सकें।

कार्यक्रम का मंच संचालन सतेंद्र जैन साहूला ने किया। इस अवसर पर भारतीय जैन संगठन उत्तर प्रदेश के राज्य महामंत्री सुरेंद्र कुमार जैन, राज्य चेयरमैन एवं कार्यक्रम संयोजक अंकेश जैन, जिला अध्यक्ष शैलेंद्र जैन, कुमार मंगलम सहित BJS के पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं श्रुत मंथन वर्षायोग समिति की ओर से मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लाला जी), मुकेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, सतेंद्र जैन (साहुल), आशीष जैन (बाबा), सचिन जैन (तार), आशु (वी.के), रोहित जैन, नितिन, सनी, अनिकेत, दीपक जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित समस्त मंडल एवं सकल जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।

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