पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

City/ STATE'S Entertainment REGIONAL आगरा धर्म/ आध्‍यात्‍म/ संस्‍कृति धार्मिक स्थानीय समाचार

तहकीकात TODAY 

रिपोर्ट — फरहान खान / प्रिया जैन 

आगरा। छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव भक्तिभाव, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, छीपीटोला से भगवान पार्श्वनाथ की पालकी धूमधाम से निकाली गई। मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह भगवान की आरती उतारकर श्रद्धा प्रकट की।

संत चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य आचार्य भगवन श्री 108 विशुद्ध सागर जी महामुनिराज के तीन अनमोल रत्न एवं परम प्रभावक सुयोग्य शिष्य श्रमण मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज, श्रमण मुनि श्री 108 शील सागर महाराज एवं श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई।

अभिषेक एवं शांतिधारा के उपरांत पुजारियों, महिला मंडल, युवा मंच, पुरुषों, महिलाओं सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भगवान पार्श्वनाथ की पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने अत्यंत भक्तिभाव के साथ निर्वाण लाड़ू अर्पित किए तथा श्री सम्मेद शिखर पर्वत की वंदना की। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन, मुनिश्री का पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं अन्य मंगलाचरण कार्यक्रम संपन्न हुए। भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण कल्याणक के अवसर पर 2803 निर्माण लाड़ू एवं 23 किलो का विशेष लाड़ू भी भक्ति भाव से समर्पित किया गया।

निर्वाण लाड़ुओं की बोली में श्रद्धालुओं ने लिया सौभाग्य

महोत्सव के दौरान निर्वाण लाड़ुओं की बोली लगाई गई। प्रथम निर्वाण लाड़ू का सौभाग्य संयुक्त रूप से कैलाश चंद जैन जयपुर परिवार ने प्राप्त किया। द्वितीय निर्वाण लाड़ू नमोस्तु शासन संघ, तृतीय श्री पारस जैन परिवार तथा चतुर्थ निर्वाण लाड़ू का सौभाग्य दिनेश चंद गौरव जैन, राजीव कुमार नमन जैन, वीरेंद्र शास्त्री एवं गौरव जैन ने प्राप्त किया।

मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को दिया धर्म का संदेश

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ को मानना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलना भी आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को बैर और वैमनस्य से दूर रहने का संदेश देते हुए कहा कि भगवान पार्श्वनाथ ने क्षमा, अहिंसा और वैर-भाव छोड़ने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा कि यदि हम भगवान को मानते हैं तो उनके सिद्धांतों को भी अपने जीवन में उतारना चाहिए। मुनिश्री ने श्री सम्मेद शिखर की वंदना के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल दर्शन करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी तीर्थंकरों और गणधर परमेष्ठियों के प्रति समान श्रद्धा एवं सम्मान का भाव रखना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से पूरी वंदना एवं सभी टोंकों के दर्शन करने का आह्वान किया।

मुनिश्री ने छीपीटोला जैन समाज को इस पावन आयोजन के लिए अहोभाग्य बताते हुए धर्म एवं श्रद्धा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम का मंच संचालन सतेंद्र जैन साहूला एवं पंडित विजय शास्त्री ने किया। कार्यक्रम में श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लाला जी), मुकेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, सतेंद्र जैन (साहुल), आशीष जैन (बाबा), सचिन जैन (तार), आशु (वी.के), रोहित जैन, नितिन, सनी, अनिकेत, दीपक जैन सहित बड़ी संख्या में सकल जैन समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे। मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भगवान पार्श्वनाथ के प्रति अपनी अटूट आस्था एवं भक्ति प्रकट की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *