तहकीकात TODAY
रिपोर्ट — फरहान खान
पोर्ट ब्लेयर, 13 अप्रैल। अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की तीन दिवसीय केंद्रीय बैठक की विधिवत शुरुआत हो गई है। सर विजयपुरम स्थित होटल ए.आर. प्राइड रेजीडेंसी में आयोजित इस अहम बैठक में देशभर से प्रांतीय सदर और नाज़िम-ए-आला शामिल हुए हैं। बैठक की अगुवाई संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद असअद मदनी कर रहे हैं, जबकि संचालन महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी द्वारा किया जा रहा है।

इस केंद्रीय मशविरे को जमीयत के संगठनात्मक भविष्य, सामाजिक भूमिका और कार्यकर्ताओं की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में उपाध्यक्ष मौलाना मोहम्मद सलमान बिजनौरी, मौलाना क़ारी मोहम्मद अमीन समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।बैठक के पहले सत्र की अध्यक्षता जमीयत उलेमा अंडमान एवं निकोबार के अध्यक्ष मुफ्ती शरफुद्दीन क़ासमी ने की। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने अंडमान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को याद करते हुए कहा कि यह धरती भारत की आज़ादी और स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों की गवाह रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थल पर इस स्तर की बैठक का आयोजन बेहद सार्थक है।बैठक के दौरान पिछली कार्यवाही का वाचन करते हुए मौलाना हकीमुद्दीन क़ासमी ने विभिन्न राज्यों की संगठनात्मक गतिविधियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। देश के अलग-अलग प्रांतों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे शैक्षिक, सामाजिक और राहत कार्यों की रिपोर्ट पेश की।दूसरे सत्र में संगठन के अध्यक्ष ने युवाओं के वैचारिक प्रशिक्षण, नेतृत्व विकास और सामाजिक सेवाओं में उनकी भागीदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को संगठन के मिशन से जोड़ना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

बैठक में “आदर्श मस्जिद” विषय भी प्रमुख रूप से चर्चा में रहा। इस दौरान मस्जिदों को केवल इबादत का स्थान न मानकर उन्हें सामाजिक सुधार, शिक्षा, नैतिक प्रशिक्षण और सामुदायिक सौहार्द का केंद्र बनाने पर जोर दिया गया।आगामी सत्रों में जमीयत की स्थानीय, जिला और प्रांतीय इकाइयों के लिए वार्षिक कैलेंडर, कार्यकर्ताओं और युवाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम, इमामों की ट्रेनिंग, मैरिज काउंसलिंग, रफीक और खैर प्रोजेक्ट तथा सीरत क्विज जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे।इस तीन दिवसीय बैठक से यह उम्मीद जताई जा रही है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद की आगामी रणनीति और गतिविधियों की स्पष्ट दिशा तय होगी, जिससे संगठन देशभर में अपने सामाजिक और शैक्षिक कार्यों को और मजबूती दे सकेगा।





