तहकीकात TODAY
रिपोर्ट – फरहान खान/ जाहिद सलमानी
आगरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सुगम्य भारत अभियान” और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के विजन को साकार करते हुए उत्तर मध्य रेलवे दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। रेलवे ने विभिन्न कॉन्ट्रैक्ट आधारित व्यवस्थाओं के माध्यम से लगभग 400 दिव्यांगजनों को रोजगार उपलब्ध कराया है, जबकि 100 दिव्यांग युवा ‘एक्ट अप्रेंटिसशिप स्कीम’ के तहत कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एन. पी. सिंह के निर्देशन में वर्ष की शुरुआत से ही तीनों मंडलों को निर्देश दिए गए कि जहां भी संभव हो, दिव्यांगजनों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसी क्रम में रेलवे ने 380 से अधिक दिव्यांगजनों को विभिन्न भूमिकाओं में रोजगार देकर दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act), 2016 की भावना के अनुरूप समान अवसर और समावेशी विकास को बढ़ावा दिया है। रेलवे में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारी ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM) ऑपरेटर, स्टेशन उद्घोषक, डेटा एंट्री ऑपरेटर, ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ (OSOP) स्टॉल संचालक तथा ग्राहक सेवा से जुड़े विभिन्न कार्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। रेलवे का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसी सोच के तहत ‘एक्ट अप्रेंटिसशिप स्कीम’ में 100 दिव्यांग युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उनके भविष्य में बेहतर रोजगार के अवसर सुनिश्चित हो सकें। यह पहल उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज, झांसी और आगरा मंडल सहित विभिन्न वर्कशॉप एवं प्रोडक्शन यूनिट में लागू की गई है। वर्तमान में प्रयागराज मंडल में 200, झांसी मंडल में 100 और आगरा मंडल में 63 दिव्यांग कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर कार्यरत हैं। इसके अलावा झांसी की विभिन्न वर्कशॉप और प्रोडक्शन यूनिट में भी दिव्यांगजनों के लिए नए अवसर सृजित किए गए हैं। उत्तर मध्य रेलवे के नियमित कार्यबल में भी समावेशिता की झलक दिखाई देती है। वर्तमान में रेलवे के स्थायी कैडर में 784 दिव्यांग कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें वर्ष 2025-26 के दौरान भर्ती किए गए 15 कर्मचारी भी शामिल हैं। उत्तर मध्य रेलवे ने स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में भी दिव्यांगजनों के लिए रोजगार, कौशल विकास और समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास करता रहेगा, ताकि एक समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।





