तहकीकात TODAY
रिपोर्ट — फरहान खान / मोनिश उद्दीन
नई दिल्ली/पोकरण। जमीयत उलमा-ए-हिंद के नौवें केंद्रीय छमाही मशविरे में संगठन की शैक्षिक, सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। राजस्थान के जैसलमेर जिले के पोकरण स्थित दारुल उलूम इस्लामिया में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर के प्रांतीय अध्यक्षों, महासचिवों और संगठन के विभिन्न विभागों के जिम्मेदारों ने भाग लिया। सम्मेलन में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने स्पष्ट संदेश दिया कि संगठन की पहली प्राथमिकता मुल्क और मिल्लत की सेवा होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं को आगे बढ़ाने, उन्हें जिम्मेदारियां सौंपने और भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार करने पर विशेष बल दिया।

सम्मेलन में अप्रैल से अक्टूबर 2026 तक की छह महीने की कार्यप्रगति की समीक्षा की गई। प्रस्तुत रिपोर्टों के अनुसार, इस अवधि में देशभर में 5,352 नए दीनी मक्तब स्थापित किए गए, जबकि 14,708 नए स्थानों पर कुरआन और हदीस के दर्स की शुरुआत हुई। इसके अलावा 9,400 युवाओं को विभाग-ए-रफीक से जोड़ा गया और जन विकास सेवा के लिए 484 गांवों का चयन किया गया। संगठन ने आगामी छह महीनों के लिए भी विभिन्न विभागों के लक्ष्य निर्धारित किए, ताकि धार्मिक शिक्षा, सामाजिक सुधार, युवा सहभागिता और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रमों का विस्तार किया जा सके।
सेवा-भाव को बनाया जाए संगठन की पहली प्राथमिकता
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले छह महीनों के दौरान संगठन के विभिन्न विभागों में प्रगति हुई है, लेकिन मिल्लत की आवश्यकताओं और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़े सभी जिम्मेदारों को अधिक मेहनत, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। मौलाना मदनी ने कहा कि मुल्क और मिल्लत की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कार्यकर्ताओं के भीतर समाज और समुदाय के हितों के लिए समर्पण की भावना मजबूत होनी चाहिए। जब सेवा का उद्देश्य सर्वोपरि होगा, तब व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, नाम और पहचान की अपेक्षा सामूहिक हितों को अधिक महत्व मिलेगा।उन्होंने पूर्वजों के संघर्ष और बलिदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछली पीढ़ियों ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ संकल्प के साथ काम किया। आज के कार्यकर्ताओं को भी उसी सेवा-भाव, जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता को अपने व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है।

युवाओं को आगे लाने और नई नेतृत्व पीढ़ी तैयार करने पर जोर
मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि किसी भी संगठन की मजबूती उसके कार्यकर्ताओं और भविष्य के नेतृत्व पर निर्भर करती है। इसलिए युवाओं को केवल संगठन से जोड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें काम करने के अवसर देना और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को इस प्रकार तैयार किया जाना चाहिए कि वे भविष्य में वर्तमान जिम्मेदारों का प्रभावी विकल्प बन सकें। इससे संगठन की गतिविधियों और उसके संदेश को देश के कोने-कोने, गांवों और बस्तियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने समान विचार रखने वाले लोगों को साथ लेकर चलने और साझा उद्देश्यों के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। जमीयत उलमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी ने भी अपने संबोधन में सेवा और समर्पण की भावना को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कार्यों का वास्तविक महत्व व्यक्तिगत प्रसिद्धि या दिखावे में नहीं, बल्कि उनके उद्देश्य और ईमानदारी में निहित होता है। पद और प्रतिष्ठा स्थायी नहीं होते, जबकि अच्छे उद्देश्य से किया गया काम समाज के लिए महत्वपूर्ण बना रहता है।
छह महीने में 5,352 नए मक्तब, 63 हजार से अधिक पहले से संचालित
सम्मेलन में प्रस्तुत शैक्षिक गतिविधियों की रिपोर्ट के अनुसार, जमीयत उलमा-ए-हिंद ने पिछले छह महीनों में 5,352 नए दीनी मक्तब स्थापित किए। संगठन के माध्यम से पहले से 63 हजार से अधिक मक्तब संचालित होने की जानकारी भी दी गई। आगामी छह महीनों में 5,332 और नए मक्तब स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कुरआन और हदीस की शिक्षा के विस्तार के तहत 5,860 नए स्थानों पर दर्स-ए-कुरआन और 8,848 नए स्थानों पर दर्स-ए-हदीस शुरू किया गया। इस प्रकार दोनों गतिविधियों को मिलाकर 14,708 नए स्थानों पर धार्मिक शिक्षण की शुरुआत हुई। सम्मेलन के एक महत्वपूर्ण सत्र में जमीयत उलमा, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुफ़्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने दीनी तालीमी बोर्ड और मक्तबों के संबंध में अपना प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बुनियादी दीनी शिक्षा के विस्तार, नए मक्तबों की स्थापना, शिक्षकों के प्रशिक्षण और शैक्षिक गतिविधियों की प्रभावी निगरानी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इस दौरान प्रांतीय इकाइयों की जिम्मेदारियों और आगामी कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।
समाज सुधार और सद्भावना के कार्यक्रमों को मिलेगा विस्तार
जमीयत की इस्लाह-ए-मुआशरा यानी समाज सुधार गतिविधियों के अंतर्गत पिछले छह महीनों में 7,351 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नैतिक प्रशिक्षण, सामाजिक सुधार और फिजूलखर्ची जैसी प्रवृत्तियों को रोकने के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। आगामी छह महीनों में 8,383 सुधारात्मक कार्यक्रम आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय एकता, आपसी सहयोग और सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए सद्भावना मंच के माध्यम से 356 कार्यक्रम आयोजित किए गए। संगठन ने अगले छह महीनों में 1,091 कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है जन विकास सेवा के अंतर्गत 484 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में सामाजिक और शैक्षिक विकास से संबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ाने की योजना है। आगामी छह महीनों में 748 अतिरिक्त गांवों को इस अभियान से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
युवाओं को जोड़ने और आदर्श मस्जिदों के विकास की योजना
संगठन के विभाग-ए-रफीक के माध्यम से 9,400 युवाओं को संगठनात्मक गतिविधियों और जनसेवा से जोड़ा गया। अगले चरण में 9,753 और युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। संगठन का उद्देश्य युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ उन्हें सामाजिक कार्यों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना है। इसी तरह, धार्मिक मार्गदर्शन और सामाजिक सेवा के केंद्र के रूप में मस्जिदों की भूमिका मजबूत करने के उद्देश्य से 1,806 आदर्श मस्जिदें स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई। आगामी छह महीनों में इनकी संख्या बढ़ाकर 2,556 करने की योजना है। संगठनात्मक प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया गया। पिछले छह महीनों में 115 कार्यशालाएं आयोजित की गईं और अगले चरण में 386 कार्यशालाएं आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, पांच हजार से अधिक संगठनात्मक बैठकों के आयोजन की जानकारी भी सम्मेलन में प्रस्तुत की गई।
फैमिली काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव
सम्मेलन की बैठकों में संगठनात्मक और सामाजिक गतिविधियों की समीक्षा के साथ भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। इस दौरान आदर्श मस्जिदों के विकास, प्रत्येक इकाई में इस्लाह-ए-मुआशरा समिति गठित करने और आदर्श जिलों में फैमिली काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। इन प्रस्तावों के माध्यम से सामाजिक सुधार, पारिवारिक समस्याओं के समाधान और समुदाय के भीतर जागरूकता बढ़ाने से संबंधित गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करके योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए।
संगठन के विभिन्न विभागों ने प्रस्तुत की रिपोर्ट
तीन दिवसीय केंद्रीय मशविरे में जमीयत उलमा-ए-हिंद के नाजिम-ए-उमूमी मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने पिछली बैठक की कार्यवाही प्रस्तुत की। कार्यक्रम के मेजबान और संगठन के उपाध्यक्ष मौलाना कारी मुहम्मद अमीन की ओर से दारुल उलूम इस्लामिया, पोकरण के शिक्षक मुफ्ती फजलुद्दीन कासमी ने स्वागत भाषण दिया। विभिन्न विभागों की रिपोर्टें ओवैस सुल्तान खान, मुफ्ती महदी हसन ऐनी, डॉ. शब्बीर मुश्ताक मीर, मौलाना मुहम्मद अखलाक और मौलाना मुहम्मद उमर कासमी ने प्रस्तुत कीं। जमीयत उलमा-ए-हिंद के सचिव मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने पैरा-लीगल प्रशिक्षण के संबंध में जानकारी दी। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता संगठन के उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी, मौलाना कारी मुहम्मद अमीन, अध्यक्ष मजलिस-ए-कायमा मुफ्ती रहमतुल्लाह मीर कश्मीरी, जमीयत उलमा कर्नाटक के अध्यक्ष मुफ्ती इफ्तिखार अहमद कासमी तथा जमीयत उलमा असम के उपाध्यक्ष मौलाना अब्दुल कादिर ने की। सभी सत्रों में संगठन की उपलब्धियों, चुनौतियों और भावी योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
तीन दिवसीय सम्मेलन में भावी कार्ययोजना पर मंथन
सम्मेलन का आयोजन दारुल उलूम इस्लामिया, पोकरण में किया गया, जहां संस्थान के शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रबंधन ने मेहमानों की व्यवस्था और सेवा में योगदान दिया। बैठकों का आरंभ उत्तर प्रदेश जमीयत के अध्यक्ष मौलाना मुफ़्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ, जबकि संस्थान के विद्यार्थियों ने नात-ए-पाक प्रस्तुत की। जमीयत उलमा-ए-हिंद का यह केंद्रीय मशविरा संगठन की छह महीने की गतिविधियों की समीक्षा और अगले चरण की प्राथमिकताएं तय करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। सम्मेलन में प्रस्तुत आंकड़ों और निर्धारित लक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि संगठन धार्मिक शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ युवा सहभागिता, सामाजिक सुधार, सद्भावना और ग्रामीण विकास से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है। मौलाना महमूद मदनी के संदेश का मुख्य सार यही रहा कि संगठन की वास्तविक मजबूती सेवा-भाव, ईमानदारी, सामूहिक जिम्मेदारी और नई पीढ़ी को नेतृत्व के लिए तैयार करने में है। सम्मेलन में तय लक्ष्यों को अब आगामी छह महीनों में धरातल पर उतारने की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया।





