गरीब बच्चों के दाखिले में लापरवाही पर सख्त हुआ प्रशासन

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आरटीई दाखिले में लापरवाही पर निजी स्कूलों को एक सप्ताह का अल्टीमेटम

तहकीकात TODAY 

रिपोर्ट — मोनिस उद्दीन / मोहम्मद सुमेर 

आगरा। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के तहत वर्ष 2026-27 में गरीब बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ जिले के निजी स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रबंधन प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में उन निजी स्कूलों की सूची पेश की गई, जहां आरटीई के तहत आवंटित बच्चों को अब तक प्रवेश नहीं दिया गया। जिलाधिकारी ने स्कूलवार समीक्षा करते हुए कई नामी स्कूलों में शून्य प्रवेश पर कड़ी नाराजगी जताई। सुमित राहुल गोयल मेमोरियल स्कूल, सिंपकिंस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, द इंटरनेशनल स्कूल आगरा, होली पब्लिक स्कूल सिकंदरा, गायत्री पब्लिक स्कूल समेत कई संस्थानों में आवंटित बच्चों का प्रवेश नहीं होने पर जवाब तलब किया गया। स्कूल प्रबंधन की ओर से कुछ मामलों में गलत दस्तावेज, अभिभावकों द्वारा संपर्क न करना और प्रवेश में रुचि न होने जैसी बातें कही गईं। इस पर जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि पात्रता की जांच करना स्कूलों का काम नहीं है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा लॉटरी से आवंटित प्रत्येक बच्चे का प्रवेश सुनिश्चित करना अनिवार्य है। यदि किसी बच्चे की पात्रता पर संदेह हो तो पहले प्रवेश दिया जाए, बाद में प्रशासन जांच करेगा।जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि अभिभावकों को गेट से लौटाने, अनावश्यक कागजी कार्यवाही में उलझाने और बच्चों को प्रवेश से वंचित करने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अब इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अभिभावकों से अंडरटेकिंग लेकर प्रवेश दिया जाए, लेकिन किसी भी हालत में बच्चे को रोका न जाए। बीएसए को निर्देश दिए गए कि यदि किसी अपात्र अभ्यर्थी की शिकायत आती है तो उसकी जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित अभिभावकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही ऐसे बच्चों की सूची भी तैयार करने को कहा गया जो दूरी या अन्य कारणों से आवंटित स्कूल में प्रवेश नहीं लेना चाहते। बैठक में बताया गया कि जनपद में आरटीई के तहत लगभग 8112 बच्चों का आवंटन हुआ है, लेकिन अब तक केवल करीब 6100 बच्चों का ही प्रवेश कराया जा सका है। इस धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी ने कड़ा संज्ञान लेते हुए शेष बच्चों का दाखिला एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्कूल द्वारा बच्चों या अभिभावकों को वापस लौटाने की शिकायत मिली तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग को प्रतिदिन प्रगति रिपोर्ट देने और सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को समयबद्ध लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में स्कूल वाहनों के सत्यापन, फिटनेस और परमिट नियमों के पालन को लेकर भी निर्देश जारी किए गए। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड, एआरटीओ आलोक अग्रवाल समेत शिक्षा विभाग के अधिकारी और निजी स्कूलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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