तहकीकात TODAY
रिपोर्ट – फरहान खान/ इस्तिकार खान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस में विवेचना के दौरान गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर अब सख्ती बरती जाएगी। पुलिसकर्मी गवाह के बयान में अपनी ओर से कोई शब्द जोड़कर या उसकी भाषा और बात का स्वरूप बदलकर दर्ज नहीं कर सकेंगे। गवाह जिस भाषा, बोली और अंदाज में अपनी बात बताएगा, विवेचक को उसे उसी रूप में दर्ज करना होगा। डीजीपी राजीव कृष्णा ने इस संबंध में प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य विवेचना में पारदर्शिता बनाए रखना और गवाह के बयान को वास्तविक तथ्यों के अनुरूप दर्ज कराना है। निर्देशों के अनुसार, गवाह अपनी बोली और भाषा में जो बात बताएगा, विवेचक को उसे उसी रूप में दर्ज करना होगा। बयान में ऐसे शब्द जोड़ना, जिन्हें गवाह ने नहीं कहा है, अथवा बयान को किसी विशेष दिशा में ले जाने की कोशिश करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। विवेचना के दौरान पुलिसकर्मी गवाह से ऐसे सवाल नहीं पूछ सकेंगे, जिनका उद्देश्य पहले से अभियुक्त के खिलाफ आरोप गढ़ना या उसे दोषी साबित करने वाला बयान तैयार कराना हो। पूछताछ और बयान दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से करनी होगी। पुलिस अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि गवाह के बयान में उसकी वास्तविक बात ही सामने आए। विवेचक की व्यक्तिगत धारणा, सोच या शब्दावली बयान पर हावी नहीं होनी चाहिए। डीजीपी के निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि विवेचना के दौरान निर्धारित नियमों की अनदेखी की जाती है तो केवल संबंधित विवेचक ही नहीं, बल्कि उसकी निगरानी करने वाले पर्यवेक्षण अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस विभाग की इस नई सख्ती को विवेचना की गुणवत्ता, निष्पक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे गवाहों के बयानों की विश्वसनीयता बढ़ने और विवेचना में पुलिस की मनमानी पर अंकुश लगने की उम्मीद है।





