वाइल्डलाइफ SOS को मिला ‘टाइगर प्रोटेक्शन एंड एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड’

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तहकीकात TODAY 

रिपोर्ट – फरहान खान/मोनिस उद्दीन 

रणथंभौर (राजस्थान)। भारत में बाघ संरक्षण और वन्यजीव अपराधों के खिलाफ लगातार तीन दशकों से सक्रिय गैर-लाभकारी संस्था वाइल्डलाइफ SOS को 5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक 2026 के दौरान प्रतिष्ठित ‘टाइगर प्रोटेक्शन एंड एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान संस्था को वन्यजीव संरक्षण, अवैध शिकार (पोचिंग) रोकने के लिए चलाए गए अभियानों तथा भारत के बाघों के सुरक्षित भविष्य के लिए किए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। राजस्थान के रणथंभौर में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में देश-विदेश के संरक्षण विशेषज्ञ, वन अधिकारी, नीति-निर्माता, शोधकर्ता, वन्यजीव फोटोग्राफर, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि और पर्यावरण प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने किया। संस्था की ओर से यह सम्मान वाइल्डलाइफ SOS के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कार्तिक सत्यनारायण ने प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्था द्वारा चलाए जा रहे एंटी-पोचिंग अभियानों, वन्यजीव अपराधों के खिलाफ खुफिया कार्रवाई तथा बाघ संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी। वर्ष 1995 में स्थापित वाइल्डलाइफ SOS पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से भारत में अवैध वन्यजीव व्यापार पर रोक लगाने, संकटग्रस्त वन्यजीवों के बचाव और उनके संरक्षण के लिए कार्य कर रही है।

संस्था की विशेष एंटी-पोचिंग इकाई ‘फॉरेस्ट वॉच’ वन विभाग, पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर वन्यजीव तस्करों के खिलाफ अभियान चलाती है। संस्था ने कई बड़े शिकारी गिरोहों का पर्दाफाश करने, वन्यजीवों की खाल, शरीर के अंग, हाथीदांत और अन्य अवैध सामग्री बरामद कराने के साथ-साथ कई मामलों में कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई है। वाइल्डलाइफ SOS ने संरक्षित वन क्षेत्रों में लगाए गए घातक फंदों और शिकार उपकरणों को हटाने के लिए विशेष अभियान भी चलाए हैं। संस्था की सक्रिय भूमिका के चलते कई संगठित शिकार गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई संभव हुई है। तमिलनाडु में बाघों के शिकार से जुड़े एक चर्चित गिरोह को दो वर्षों की कानूनी प्रक्रिया के बाद सजा दिलाने में भी संस्था का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सम्मान प्राप्त करने के बाद कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि यह पुरस्कार केवल संस्था का नहीं, बल्कि उन सभी वनकर्मियों, पुलिस अधिकारियों, स्थानीय समुदायों और स्वयंसेवकों का सम्मान है जो अपनी जान जोखिम में डालकर भारत के बाघों और अन्य वन्यजीवों की रक्षा में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि अवैध शिकार के खिलाफ लड़ाई जंगलों के दूर-दराज़ इलाकों में बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लड़ी जाती है और इस संघर्ष को निरंतर जारी रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में कुख्यात वन्यजीव तस्करों और संगठित शिकार गिरोहों ने वर्षों तक बाघों, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुँचाया है। संस्था द्वारा उपलब्ध कराई गई खुफिया सूचनाओं के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB), हरियाणा पुलिस और हरियाणा वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कुख्यात तस्कर भीमा बावरिया को गुरुग्राम से बाघ के कंकाल, बाघ की खाल, कछुओं तथा अन्य वन्यजीव तस्करी सामग्री के साथ गिरफ्तार किया था। उन्होंने कहा कि वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी रोक के लिए मजबूत कानूनी कार्रवाई, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और जनभागीदारी बेहद जरूरी है। कार्यक्रम में मौजूद दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने कहा कि वन्यजीव अपराधों के खिलाफ समाज में जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका भी ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कानूनी कार्रवाई के माध्यम से वन्यजीव अपराधियों के खिलाफ मजबूत संदेश दे सकती है। वहीं, वाइल्डलाइफ SOS की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि भारत में बाघों की संख्या में वृद्धि निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन यह सफलता अभी भी संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि अवैध शिकार आज भी बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है और उनके सुरक्षित भविष्य के लिए सभी पक्षों को मिलकर लगातार प्रयास करने होंगे। गौरतलब है कि इंटरनेशनल टाइगर वीक कंजर्वेशन अवॉर्ड्स 2026 के तहत वन्यजीव संरक्षण, एंटी-पोचिंग, संरक्षण नेतृत्व, पत्रकारिता, फोटोग्राफी और आजीवन संरक्षण योगदान जैसी विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया। वाइल्डलाइफ SOS को मिला यह सम्मान भारत में बाघ संरक्षण और वन्यजीव अपराधों के खिलाफ उसके दीर्घकालिक और प्रभावी योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है।

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