तहकीकात TODAY
रिपोर्ट – फरहान खान/ मोहम्मद सुमेर
आगरा। सरताज-ए-आगरा हज़रत सैयदना शाह अमीर अबुल उला (रह.) का सालाना कुल शरीफ शनिवार, 25 जुलाई 2026 (9 सफर 1448 हिजरी) को दरगाह परिसर में पूरे धार्मिक सम्मान और अकीदत के साथ मनाया गया। कुल शरीफ की रस्म सज्जादा नशीन व मुतवल्ली हज़रत सैय्यद मोहतशिम अली अबुल उलाई की सरपरस्ती में अदा की गई।

इस अवसर पर नायब सज्जादगान हज़रत हाजी सैय्यद विरासत अली अबुल उलाई, सैय्यद इशाअत अली अबुल उलाई, सैय्यद कैफ अली अबुल उलाई तथा पीरज़ादा हज़रत अरशद फरीद चिश्ती, सज्जादा नशीन दरगाह हज़रत शेख सलीम चिश्ती (रह.), फतेहपुर सीकरी सहित देशभर से आए अकीदतमंदों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान सज्जादानशीन हज़रत सैय्यद मोहतशिम अली ने पीरज़ादा हज़रत अरशद फरीद चिश्ती की दस्तारबंदी कर उनका स्वागत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन शरीफ की तिलावत से हुई। इसके बाद दरगाह परिसर में गुलाबजल की वर्षा की गई। मान्यता है कि कुल शरीफ के दौरान पड़ने वाले गुलाबजल के छींटों से मुरादें पूरी होती हैं। अंत में देश की उन्नति, विकास, आपसी भाईचारे, अमन और शांति के लिए विशेष दुआ की गई।

इस मौके पर सज्जादानशीन के परिवार से सैय्यद इकबाल अली, सैय्यद अरीब अली, सैय्यद आसिम अली, सैय्यद शहाब अली, सैय्यद अज़हर अली, सलीम-उज़-ज़मा, सऊद-उज़-ज़मा और जाज़ेब-उज़-ज़मा सहित भारत के विभिन्न राज्यों से आए विशेष मेहमान मौजूद रहे।

कुल शरीफ के अवसर पर हज़रत सैयदना शाह अमीर अबुल उला (रह.) के जीवन और योगदान पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि उनके व्यक्तित्व के निर्माण में उनके नाना हज़रत ख्वाजा फैजी (रह.) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके शहीद होने के बाद राजा मानसिंह ने हज़रत सैयदना की योग्यता से प्रभावित होकर उन्हें उच्च प्रशासनिक दायित्व दिलाने के लिए सम्राट अकबर से सिफारिश की, जिसे स्वीकार करते हुए अकबर ने उन्हें वरदवान का गवर्नर तथा सह-हज़ारी पद से सम्मानित किया। उनके जीवन को सूफी परंपरा, सेवा, आध्यात्मिक नेतृत्व और जनकल्याण का प्रेरणास्रोत बताया गया।





