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रिपोर्ट – फरहान खान/ मोहम्मद सुमेर
बेरूत। लेबनान की संसद ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को देश में मृत्युदंड समाप्त करने के प्रस्ताव को बहुमत से मंजूरी दे दी। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद गंभीर अपराधों में दोषी पाए जाने वाले लोगों को मृत्युदंड की जगह उम्रकैद और कठोर श्रम जैसी सजा दिए जाने का प्रावधान होगा।संसद के इस फैसले को लेबनान के न्यायिक और मानवाधिकार इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। कानून के स्तर पर मृत्युदंड समाप्त करने के बाद लेबनान अरब दुनिया में इस दिशा में बड़ा कदम उठाने वाला देश बन गया है। हालांकि, अरब क्षेत्र से बाहर तुर्किये जैसे कुछ देशों में मृत्युदंड पहले ही समाप्त किया जा चुका है।लेबनान की 128 सदस्यीय संसद में मृत्युदंड समाप्त करने के प्रस्ताव को बहुमत का समर्थन मिला। हालांकि, हिजबुल्ला के संसदीय गुट ने प्रस्ताव का विरोध किया और मतदान प्रक्रिया से अलग रहा। इसके बावजूद प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन हासिल हुआ और संसद ने इसे मंजूरी दे दी।लेबनान में मृत्युदंड कानूनी तौर पर मौजूद था, लेकिन वर्ष 2004 के बाद किसी भी दोषी को फांसी नहीं दी गई। यानी करीब 22 वर्षों से देश में मृत्युदंड पर व्यवहारिक रोक बनी हुई थी। अब संसद के फैसले के बाद इसे कानूनी रूप से समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया गया है।संसद के फैसले का मानवाधिकार संगठनों और मृत्युदंड विरोधी अभियानों से जुड़े लोगों ने स्वागत किया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञ भी पहले प्रस्तावित कानून को जीवन के अधिकार की सुरक्षा मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण सुधार बता चुके हैं। मृत्युदंड समाप्त होने के बाद गंभीर अपराधों के लिए उम्रकैद सबसे कठोर सजा होगी। इसके जरिए सरकार का उद्देश्य गंभीर अपराधों में कठोर दंड की व्यवस्था बनाए रखते हुए राज्य द्वारा मृत्युदंड दिए जाने की प्रक्रिया को समाप्त करना है। लेबनान के न्याय मंत्री आदिल नसार ने इस फैसले को देश के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है। संसद का यह निर्णय लंबे समय से चल रही मृत्युदंड समाप्त करने की बहस के निर्णायक परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहे लेबनान में यह फैसला न्याय व्यवस्था और मानवाधिकार नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।





