तहकीकात TODAY
रिपोर्ट – फरहान खान / राजकुमार मीना
आगरा। आगरा में सरकारी जमीन की बंदरबांट और अधिकारियों-कर्मचारियों की कथित मिलीभगत का बड़ा मामला सामने आया है। धाकरान चौराहे के पास स्थित सरकारी संपत्ति को निजी भूमि बताकर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किए जाने का मामला उजागर हुआ है। हैरानी की बात यह है कि संबंधित भूखंड के लिए दो अलग-अलग और विरोधाभासी एनओसी जारी होने की बात सामने आई है। इसी आधार पर भवन का नक्शा भी आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) से स्वीकृत करा लिया गया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन और विकास प्राधिकरण में हलचल मच गई है। जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2025 में संबंधित भूखंड पर भवन निर्माण का नक्शा स्वीकृत कराने के लिए एडीए के पोर्टल पर आवेदन किया गया था। इस प्रक्रिया के दौरान जमीन के स्वामित्व और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए। आरोप है कि सरकारी भूमि को निजी संपत्ति दर्शाकर एनओसी जारी की गई, जिसके आधार पर नक्शा पास कराने का रास्ता साफ हुआ। नजूल विभाग की रिपोर्ट ने खड़े किए सवाल इस पूरे मामले में नजूल विभाग की रिपोर्ट अहम मानी जा रही है। रिपोर्ट में संबंधित जमीन को सरकारी संपत्ति बताया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जमीन सरकारी थी, तो उसे निजी संपत्ति बताकर एनओसी किस आधार पर जारी की गई? एक ही भूखंड के संबंध में दो विरोधाभासी एनओसी जारी होने का मामला भी जांच के केंद्र में है। अब यह पता लगाने की जरूरत है कि दोनों दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए और उनके आधार पर भवन का नक्शा कैसे स्वीकृत हो गया। अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे और नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया में अधिकारियों तथा कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पूरे प्रकरण में दस्तावेजों की जांच के साथ यह पता लगाया जाएगा कि जमीन के स्वामित्व से संबंधित तथ्यों का सत्यापन किस तरह किया गया। यदि सरकारी भूमि को निजी दर्शाकर नियमों के विपरीत एनओसी जारी करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय हो सकती है। डीएम ने दिए जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के निर्देश मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कराने और पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में जमीन के वास्तविक स्वामित्व, जारी की गई दोनों एनओसी, नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है। फिलहाल धाकरान चौराहे के पास सरकारी संपत्ति से जुड़े इस मामले ने सरकारी भूमि की सुरक्षा और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर जांच पर टिकी है। देखना होगा कि सरकारी जमीन को निजी बताकर एनओसी जारी करने और भवन का नक्शा स्वीकृत कराने के इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।





