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रिपोर्ट – फरहान खान/ राजकुमार मीना
आगरा। विकासखंड पिनाहट के उच्च प्राथमिक विद्यालय मानिकपुरा में विज्ञान शिक्षण को रोचक, व्यावहारिक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की अनूठी पहल रंग ला रही है। विद्यालय में ‘Learning by Doing’ पद्धति के माध्यम से बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय स्वयं प्रयोग करने, मॉडल तैयार करने, समस्याओं को समझने और उनके वैज्ञानिक समाधान तलाशने का अवसर दिया जा रहा है। इस नवाचार का संचालन सहायक अध्यापक एवं गतिविधि आधारित शिक्षण प्रभारी प्रमोद सागर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा, रचनात्मकता, तार्किक चिंतन और नवाचार की भावना को विकसित करना है। विद्यालय में स्थापित गतिविधि आधारित विज्ञान प्रयोगशाला में बच्चे विभिन्न वैज्ञानिक अवधारणाओं को स्वयं प्रयोग करके समझ रहे हैं। विद्यार्थियों ने स्वचालित ऊंचाई मापन प्रणाली, स्मार्ट पार्किंग व्यवस्था, बाधा से बचने वाला रोबोट, आवाज से नियंत्रित कार, स्वचालित कूड़ेदान, स्वचालित टोल गेट और जल आधारित खेती प्रणाली जैसे उपयोगी मॉडल तैयार किए हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों को जल एवं मिट्टी परीक्षण, वर्मी कम्पोस्ट, सौर ऊर्जा आधारित मॉडल, इलेक्ट्रॉनिक परिपथ, हृदय का मॉडल, प्रकाशिकी के मॉडल तथा विभिन्न रासायनिक एवं जैविक प्रयोगों के जरिए विज्ञान को व्यावहारिक रूप से समझाया जा रहा है।

विद्यालय में बच्चों को केवल तैयार मॉडल दिखाने पर जोर नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें यह समझने के लिए प्रेरित किया जाता है कि कोई मॉडल किस वैज्ञानिक सिद्धांत पर काम करता है। बच्चे सेंसर के काम करने का तरीका, मापन की प्रक्रिया और किसी समस्या का वैज्ञानिक समाधान खोजने की प्रक्रिया को स्वयं समझते हैं। ‘Learning by Doing’ पद्धति में विद्यार्थी पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार होते हैं। वे स्वयं योजना बनाते हैं, सामग्री का चयन करते हैं, माप लेते हैं, मॉडल तैयार करते हैं, प्रयोग करते हैं और प्रयोग के दौरान सामने आने वाली गलतियों को पहचानकर उनमें सुधार भी करते हैं। पीवीसी पाइप की माप और कटिंग, इलेक्ट्रॉनिक परिपथ तैयार करना, सेंसर जोड़ना, प्रोग्राम को नियंत्रक उपकरण में डालना और जल आधारित खेती प्रणाली में जल प्रवाह का परीक्षण जैसी गतिविधियों से बच्चों को वास्तविक जीवन से जुड़े व्यावहारिक अनुभव मिल रहे हैं। विद्यालय की नियमित विज्ञान कक्षाओं में भी गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। अम्ल-क्षार की पहचान, सूक्ष्मदर्शी से सूक्ष्म जीवों का अवलोकन, प्रकाश संश्लेषण, कोशिका एवं पादप संरचना जैसे विषयों को प्रयोग और गतिविधियों के जरिए समझाया जाता है। इससे विद्यार्थी वैज्ञानिक अवधारणाओं को सिर्फ याद करने के बजाय उन्हें स्वयं प्रयोग करके समझने का प्रयास कर रहे हैं। गतिविधि आधारित शिक्षण का बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। इससे विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि और जिज्ञासा के साथ-साथ तार्किक चिंतन, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित हो रही है।

तकनीकी गतिविधियों के जरिए बच्चों का इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल उपकरणों के प्रति आत्मविश्वास भी बढ़ा है। इसके अलावा टीम में काम करना, अपने विचार व्यक्त करना और अपने बनाए मॉडल की कार्यप्रणाली दूसरों को समझाना भी वे सीख रहे हैं। इस पहल से बच्चों में ‘मैं भी बना सकता/सकती हूं’ जैसी सकारात्मक सोच विकसित हो रही है, जो उनके आत्मविश्वास और विज्ञान के प्रति रुचि में साफ दिखाई देती है। विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न मॉडल और प्रयोग विद्यालय स्तर के साथ-साथ विभिन्न शैक्षिक एवं विज्ञान संबंधी अवसरों पर भी प्रस्तुत किए गए हैं। खास बात यह है कि बच्चों को अपने मॉडल की कार्यप्रणाली स्वयं समझाने का अवसर दिया जाता है, जिससे उनमें वैज्ञानिक समझ के साथ प्रस्तुतीकरण और संवाद कौशल भी विकसित हो रहा है। विद्यालय की इस पहल का उद्देश्य महज मॉडल तैयार करना नहीं, बल्कि बच्चों को सोचने, सवाल पूछने, प्रयोग करने, गलतियों से सीखने, समस्याओं का समाधान तलाशने और नए विचारों को वास्तविक रूप देने के लिए तैयार करना है।उच्च प्राथमिक विद्यालय मानिकपुरा की यह पहल इस बात का उदाहरण बन रही है कि गतिविधि आधारित शिक्षण के जरिए सरकारी विद्यालयों में विज्ञान शिक्षा को रोचक, प्रयोगात्मक, आधुनिक और जीवनोपयोगी बनाया जा सकता है।





