तहकीकात TODAY
रिपोर्ट — फरहान खान / जाहिद सलमानी
आगरा। लंबित मांगों के निस्तारण को लेकर आगरा में लेखपालों ने मोर्चा खोल दिया है। फतेहाबाद तहसील में लेखपालों ने धरना देते हुए संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार किया। लेखपालों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा और समस्याओं के जल्द निस्तारण की मांग की। लेखपालों का कहना है कि लंबे समय से उनकी कई मांगें शासन स्तर पर लंबित हैं, लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हो सका है। इसी के विरोध में लेखपालों ने तहसील परिसर में धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। लेखपालों ने सबसे प्रमुख मांग के तौर पर 2800 ग्रेड पे लागू किए जाने की मांग उठाई। इसके साथ ही वेतन विसंगति को दूर करने की मांग भी की गई। लेखपालों का कहना है कि वेतन संबंधी विसंगतियों का समाधान लंबे समय से लंबित है, इसलिए शासन को इस दिशा में जल्द निर्णय लेना चाहिए। इसके अलावा लेखपालों ने अंतर्मंडलीय तबादले शुरू करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि तबादलों की प्रक्रिया शुरू होने से लंबे समय से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को राहत मिल सकेगी। वहीं लंबित पदोन्नति सूची जारी करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

धरने के दौरान लेखपालों ने अपने कार्य से जुड़ी सुविधाओं और भत्तों में बढ़ोतरी की भी मांग की। इसमें स्टेशनरी भत्ता, मोटरसाइकिल भत्ता और विशेष भत्ते बढ़ाने की मांग शामिल है। लेखपालों का कहना है कि फील्ड में लगातार काम करने के बावजूद उन्हें मिलने वाली सुविधाएं उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं हैं। लेखपालों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर सभी लंबित समस्याओं का जल्द निस्तारण किए जाने की मांग की है। साथ ही संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। लेखपालों ने 17 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार की चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि मांगों का समाधान नहीं होने की स्थिति में प्रदेशभर के लेखपाल कार्य बहिष्कार कर आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। फतेहाबाद तहसील में धरने के दौरान लेखपालों ने सरकार के सामने अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा। संपूर्ण समाधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजन के बहिष्कार के जरिए लेखपालों ने शासन का ध्यान अपनी लंबित समस्याओं की ओर खींचने का प्रयास किया। लेखपालों का कहना है कि उनका आंदोलन अपनी सेवा संबंधी और आर्थिक मांगों को लेकर है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ज्ञापन में शामिल सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके और आंदोलन की स्थिति पैदा न हो। फिलहाल लेखपालों के इस ऐलान के बाद आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना है। 17 अक्टूबर से प्रस्तावित प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार को लेकर अब शासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।





