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रिपोर्ट — फरहान खान / इस्तिकार खान
आगरा। सर्दियों के मौसम में कोहरे के कारण रेल परिचालन के दौरान होने वाली चुनौतियों और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आगरा रेल मंडल ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कोहरे के दौरान ट्रेनों का सुरक्षित और संरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विद्युत परिचालन विभाग की ओर से मंडल कार्यालय के समीक्षा कक्ष में संरक्षा सेमिनार का आयोजन किया गया। 30 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस सेमिनार में मंडल रेल प्रबंधक गगन गोयल ने विशेष रूप से तैयार की गई ‘सिग्नल लोकेशन बुक’ का विमोचन किया। यह पुस्तिका कोहरे के दौरान लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका साबित होगी।

कोहरे के मौसम में सबसे बड़ी चुनौती रेलवे ट्रैक पर दृश्यता का कम होना है। कई बार घने कोहरे के कारण लोको पायलटों को दूर से सिग्नल दिखाई नहीं देते, जिससे ट्रेन संचालन में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने सिग्नल लोकेशन बुक तैयार की है। इस पुस्तिका में प्रत्येक सेक्शन में आने वाले सिग्नलों की स्थिति, उनकी दूरी और पहचान से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इसकी मदद से लोको पायलट कम दृश्यता की स्थिति में भी रास्ते में आने वाले सिग्नलों की सही लोकेशन का पता लगा सकेंगे और निर्धारित नियमों के अनुसार सुरक्षित तरीके से ट्रेनों का संचालन कर सकेंगे। इस पुस्तिका में केवल सिग्नलों की लोकेशन ही नहीं, बल्कि रेल परिचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तकनीकी विषयों को भी शामिल किया गया है। इसमें मॉडिफाइड ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली, क्रिटिकल सिग्नल और राइट हैंड साइड वाले सिग्नलों की लोकेशन, रेल पथ पर जर्क लगने की स्थिति में की जाने वाली कार्रवाई, विभिन्न विषयों पर जारी जॉइंट प्रोसीजर ऑर्डर, लोड स्टॉलिंग से बचाव और आगरा मंडल के ग्रेडिएंट चार्ट की जानकारी भी दी गई है। इस प्रकार यह पुस्तिका लोको पायलटों के लिए कोहरे के दौरान ट्रेन संचालन में एक महत्वपूर्ण पथ प्रदर्शक का काम करेगी।

संरक्षा सेमिनार में कोहरे के मौसम में रेल संचालन को सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखने के लिए आवश्यक सावधानियों, तकनीकी उपायों और आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल पर विस्तार से चर्चा की गई। रेलवे के शून्य दुर्घटना लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर्मचारियों को विभिन्न तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। इस दौरान मॉडिफाइड ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम, रेल पथ पर जर्क और लर्च महसूस होने की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, ऑटोमैटिक सिग्नल खराब होने अथवा ऑन स्थिति में होने पर उसे पार करने के निर्धारित नियमों और कवच-4.0 की कार्यप्रणाली को लेकर प्रेजेंटेशन के माध्यम से विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। सेमिनार में मौजूद लोको निरीक्षकों, लोको पायलटों और अन्य रेल कर्मचारियों को बताया गया कि कोहरे के दौरान ट्रेन संचालन में छोटी सी लापरवाही भी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। दृश्यता कम होने के कारण सिग्नलों की पहचान में परेशानी आती है, वहीं ट्रेनों की ब्रेकिंग दूरी और उनके बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने को लेकर भी विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। ऐसे में कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान पूरी तरह सजग और सतर्क रहने के साथ रेलवे के निर्धारित नियमों और संरक्षा निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम के दौरान संरक्षा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने कर्मचारियों के तकनीकी ज्ञान को अपडेट करने और उनकी कार्यकुशलता बढ़ाने पर जोर दिया। सेमिनार में उपस्थित लोको निरीक्षकों, पर्यवेक्षकों और कर्मचारियों ने विभिन्न तकनीकी विषयों को लेकर सवाल भी पूछे, जिनका अधिकारियों ने विस्तार से जवाब दिया। कर्मचारियों की समस्याओं और सुझावों पर भी चर्चा कर उनके समाधान के प्रयास किए गए। रेलवे अधिकारियों का उद्देश्य कोहरे के मौसम में होने वाली परिचालन संबंधी चुनौतियों को पहले से समझकर ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे ट्रेनों का संचालन सुरक्षित बना रहे और यात्रियों को भी किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। सिग्नल लोकेशन बुक का विमोचन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक गगन गोयल के साथ अपर मंडल रेल प्रबंधक गिरीश कुमार गुप्ता, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर परिचालन सरयू प्रसाद पाण्डेय, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर अनिल सिंह पटेल, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर सामान्य शैलेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, पर्यवेक्षक और कर्मचारी मौजूद रहे।





